Tuesday, May 14, 2019

बालिकाओं को उच्चतम शिक्षा दिलवाकर प्रतिभाओं को बढने का मौका दें- प्रो. त्रिपाठी
महिला शिक्षा के बढते कदम पुस्तिका का विमोचन

लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘‘महिला शिक्षाः बढते कदम’’ पुस्तिका का विमोचन मंगलवार को महाविद्यालय के सेमीनार हाॅॅल में प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में प्राचार्य प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने पुस्तिका की विशेषताओं और उपयोगिता के बारे में बताते हुये बताया कि यह पुस्तिका कन्या शिक्षा के क्षेत्र में बहुत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि आज सब जगह कन्यायें अपना परचम फहरा रही है। लड़कियों की काबिलियत के सभी कायल हैं, ऐसे में आवश्यकता यह है कि कहीं ऐसा न हो कि उनकी शिक्षा में कोई अड़चन पैदा हो और प्रतिभा को फलने-फूलने से रोक दिया जावे। अपने क्षेत्र में उच्चतम शिक्षा की व्यवस्था करने एवं बालिकाओं को शिक्षा के साथ संस्कारवान, चरित्रवान और नैतिक मूल्यों से सराबोर बनाने का काम इस क्षेत्र में महिला शिक्षा को निरन्तर बढावा दे रहा है यह आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय। यहां अध्ययनरत छात्राओं के सर्वांगीण विकास की ओर पूरा ध्यान दिया जाता है। यहां शैक्षणेत्तर गतिविधियों का संचालन विविध क्लबों का गठन किया जाकर किया जाता है, जिनमें व्यक्तित्व विकास, वक्तृत्व कला, लेखन कला, नृत्य व संगीत, विविध खेल अभ्यास व स्पर्धायें, ध्यान, घुड़सवारी आदि कार्यक्रम निरन्तर करवाये जाते हैं। इनके अलावा एनएसएस, एनसीसी की इकाइयांे के संचालन से भी उनका विकास किया जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये भी यहां विशेष व्यवस्था उपलब्ध है। इस महाविद्यालय में उत्कृष्ट व्यवस्था व सुविधाओं वाला छात्रावास, स्वास्थ्यदायी भोजन व्यवस्था, सुदूर गांवों तक बसों की व्यवस्था, पूरे परिसर में वाई-फाई की सुविधा आदि उपलब्ध है। इस अवसर पर डा. प्रगति भटनागर, कमल कुमार मोदी, अभिषेक चारण, रत्ना चैधरी, बलबीर सिंह चारण, योगेश टाक, घासीलाल शर्मा आदि उपस्थित रहे।

Monday, March 13, 2017


इरोम शर्मिला की हार बताती है कि ऐतिहासिक बलिदान से चुनाव नहीं जीते जाते
मणिपुर में 86 फीसदी वोट पड़े थे, लेकिन 16 साल तक ऐतिहासिक संघर्ष करने वालीं इरोम शर्मिला को सिर्फ 90 मतदाताओं का साथ ही मिल सका

दुनिया के इतिहास में ऐसा शायद ही पहले कभी-कहीं हुआ हो. वह नवंबर 2000 की बात है. मणिपुर से असम राइफल्स के साथ मुठभेड़ में 10 लोगों के मारे जाने की खबर आई थी. मालोम में हुई फर्जी मुठभेड़ की उस घटना ने 28 साल की एक युवती को भीतर तक हिलाकर रख दिया. असर ऐसा हुआ कि जिस उम्र में लोग आने वाले कल के सपने देखने और उन्हें सच करने में जुटे रहते हैं, उस दौर में वह तपस्या पर बैठ गई. भूखी-प्यासी. अपने लिए नहीं, बल्कि सिर्फ एक इतनी सी मांग लेकर कि जिस मिट्‌टी में वह पैदा हुई, जिसमें पली-बढ़ी, वहां के लोगों पर अत्याचार बंद हो. वह सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) हटा लिया जाए जो सुरक्षा बलों को सिर्फ शक के बिना पर ही किसी को गिरफ्तार कर लेने और गोली मारने तक की इजाजत दे देता है.

इसके बाद पूरे 16 साल तक इरोम शर्मिला अकेले लड़ती रहीं. इस दौरान उनके तीन ही ठिकाने थे - जेल, अस्पताल या अदालत. इतने साल में वे अपनी मां से भी सिर्फ एक बार ही मिलीं. दुनिया में किसी एक शख्स के संघर्ष का यह इतिहास बन गया. लोग उन्हें ‘आयरन लेडी’ (लौह महिला) कहने लगे. आदर्श मानने लगे. मगर सरकार तो ‘सरकार’ थी न. उसने कुछ नहीं माना. सो, धुन की पक्की इस महिला ने सोचा कि वह खुद सरकारी राज-तंत्र में शामिल होकर लड़ाई आगे बढ़ाए. सो, अगस्त 2016 में इरोम शर्मिला ने भूख हड़ताल खत्म कर ऐलान किया कि वे चुनाव लड़ेंगी. आम लोगों से मिलने वाले प्यार-सम्मान पर उन्हें कुछ ज्यादा ही भरोसा जो था.

लेकिन 11 मार्च 2017 को इस भरोसे का नतीजा सामने आ चुका है. इरोम शर्मिला चानू को मणिपुर की थोबल सीट से सिर्फ 90 वोट ही मिल पाए. चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों में वे आखिरी नंबर पर रहीं. जाहिर है, जमानत भी जब्त हो गई. अभी तीन दिन बाद ही यानी 14 मार्च को 45 साल की हो रहीं इरोम को उनके अपने लोगों से जन्मदिन का यह तोहफा मिलना किसी सदमे से कम नहीं रहा होगा. तभी तो चुनाव नतीजों के तुरंत बाद उन्होंने अपनी पीड़ा जताई, ‘मैं जैसी हूं, उस तरह लोगों ने मुझे स्वीकार नहीं किया. मैं खुद को ठगा हुआ महसूस करती हूं. मैं अब राजनीति से बुरी तरह थक चुकी हूं. इसलिए अगले कुछ दिन तक आश्रम में रहकर आराम करना चाहती हूं.’ कहना न होगा कि अपने आगे के संघर्ष में वे एक बार फिर अकेली नजर आ रही है.

इरोम ने राजनीति में बड़ी उम्मीदों से कदम रखा था. पीआरजेए (पीपुल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस) नाम से पार्टी बनाई. लेकिन राज्य की 60 सीटों वाली विधानसभा के लिए उनकी पार्टी से चुनाव लड़ने को सिर्फ दो और लोग राजी हुए. यानी इरोम के समेत कुल तीन. इन लोगों ने क्राउड फंडिंग जैसे साफ-सुथरे तरीकों से बमुश्किल साढ़े चार-पांच लाख रुपए जमा किए. लेकिन उनकी यह ईमानदार कोशिश, भाजपा-कांग्रेस के भारी-भरकम संसाधनों के बीच जैसे दम तोड़ गई. दो चरणों में राज्य के 86 फीसद मतदाता वोटिंग के लिए निकले. लेकिन उनका बड़ा हिस्सा दो बड़ी पार्टियों के बीच ही बंट गया. इरोम और उनके साथियों की ईमानदारी, उनका त्याग, उन्हें अपनी तरफ नहीं खींच सका. जाहिर है, इरोम के दो साथियों की भी जमानत जब्त हो गई.

गहराई तक ध्रुवों में बंटे मणिपुर में विभाजन की खाई को और चौड़ा करने में लगी भाजपा और कांग्रेस को यहां के लोगों ने ज्यादा पसंद किया है. चुनाव नतीजों के मुताबिक सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को हुआ है. साल 2012 के चुनाव के दौरान राज्य में बमुश्किल न के बराबर उपस्थिति दर्ज कराने वाली इस पार्टी ने इस बार 20 सीटें जीती हैं. जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चार उम्मीदवार जीते हैं. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष (दिवंगत) पीए संगमा की यह पार्टी अभी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) का हिस्सा है. एक उम्मीदवार अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) का जीता है और पांच सीटें अन्य के खाते में गई हैं.

ऐसे में पिछले 15 साल से राज्य की सत्ता पर काबिज कांग्रेस 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी भले बनी हो, लेकिन उसे सरकार बनाने के लिए संघर्ष करना होगा. क्योंकि यहां बहुमत के लिए 31 सीटें चाहिए. अगर अन्य पांच और तृणमूल के एक विधायक का समर्थन उसे मिल गया, तब भी बहुमत से दो सीटें (27+6=33) ही उसके पास ज्यादा होंगी. जानकारों के मुताबिक फिर दूसरा खतरा यह रहेगा कि भाजपा कहीं अरुणाचल प्रदेश की कहानी यहां भी न दोहरा दे, जहां वह पूरी कांग्रेस सरकार को ही भाजपामय कर चुकी है. और अब तो भाजपा के पास असम जैसे उत्तर-पूर्व के सबसे बड़े राज्य में अपनी सरकार भी है. लिहाजा, आने वाले दिनों में मणिपुर की राजनीति में काफी उठापटक देखने को मिले तो किसी को अचरज नहीं होना चाहिए. आखिर यह वहां के लोगों का ही फैसला है!

Thursday, July 18, 2013

sumitra arya: सुमित्रा आर्य ने किया पत्रकार जगत का नाम रोशन: सर्वाधिक मतों से पार्षद बनने के बाद जिला आयोजना समिति में भी भारी जीत

     सर्वाधिक मतों से पार्षद बनने के बाद जिला आयोजना समिति में भी भारी जीत
नागौर । जिला आयोजना समिति, नागौर के चुनाव में  लाडनूं से  प्रकाशित प्रमुख समाचार पत्र कलम कला की सम्पादक एवं पार्षद सुमित्रा आर्य शहरी क्षेत्र से सदस्य के रूप में भारी मतों से विजयी घोषित की गई। लाडनूं के सैनी समाज की श्रीमती सुमित्रा आर्य ने पूरे जिले में सर्वाधिक वोट जुटाने में सफलता हासिल की। उनकी इस जीत से समूचा पत्रकार जगत व सैनी समाज गौरवान्वित हुआ है।  शहरी क्षेत्र के तीन सदस्यों के निर्वाचन के लिए नागौर जिले की सभी दस नगरपालिकाओं के अध्यक्षो, उपाध्यक्षोंं एवं पार्षदों की बैठक बुलाई गई। इन्हीं सभी कुल 285 जनप्रतिनिधियों ने इस चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इसके बाद 12 जनों ने नामांकन पेश किए। इनमें से पांच ने नामांकन वापस ले लिए। सात जने मैदान में रह गए। बाद में मौेजूद 217 ने मतदान किया। मतगणना में दो मत खारिज कर दिए गए। मतदान अघिकारी अशोक कुमार खत्री ने बताया कि मतगणना के बाद दौरान सुमित्रा आर्य- लाडनूं को सर्वाधिक 106 मत मिले। ये बने सदस्य - चुनाव अघिकारी के.एम. दूडिया ने बताया कि लाडनूं की पार्षद सुमित्रा आर्य, नागौर पार्षद तौफिक रज्जा एवं मेडतासिटी के पार्षद रामनिवास भंवरिया चुने गए हैं। सुमित्रा आर्य को सर्वाधिक मत मिलने के बाद मेड़ता के रामनिवास भंवरिया व नागौर के तौफीक रजा को भी विजयी घोषित किया गया।
आयोजना समिति की स्थिति -जिला आयोजन समिति में 25 सदस्य होते हैं। इनमें पांच मनोनीत सदस्य एवं 20 निर्वाचित सदस्य होते हैं। निर्वाचित सदस्य जिले की ग्रामीण एवं शहरी जनसंख्या के अनुपात में चुने जाते हैं। जिले की ग्रामीण जनसंख्या के अनुसार 17 ग्रामीण एवं तीन शहरी सदस्य चुने जाते हैं। 17 ग्रामीण सदस्यों का चुनाव गत दिनों किया गया। समिति मे तीन शहरी सदस्य अब चुन लिए गए।
जीत पर बधाइयां व जुलूस
 जिला आयोजना समिति के चुनावों में लाडनूं के वार्ड सं. 16 से पार्षद श्रीमती सुमित्रा आर्य की जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी में हर्ष की लहर दौड़ गई। जिले में सर्वाधिक मतों से हुई इस जीत पर पूर्व विधायक मनोहरसिंह, पालिकाध्यक्ष बच्छराज नाहटा, उपाध्यक्ष याकूब शेख, भाजपा शहर अध्यक्ष मुरलीधर सोनी, पार्षदों सहित जिलेभर के भाजपा पदाधिकारियों, नगरपालिका अध्यक्षों आदि ने उन्हें बधाई दी है। नावां के पार्षद राधेश्याम सैनी, परबतसर के अपाध्यक्ष प्रेम कुमार सैनी, पार्षद मूलचंद सैनी एडवोकेट, पार्षद घनश्याम बागड़ी  आदि ने  भी सुमित्रा आर्य की जीत पर हर्ष व्यक्त किया व उन्हें बधाइयां दी। नागौर में जिला परिषद कार्यालय में आयोजित जिला आयोजना समिति के चुनावों में तीन पदों के लिए कुल 7 उम्मीदवार मैदान में थे जिनमें भारतीय जनता पार्टी की श्रीमती सुमित्रा आर्य, तौफीक रजा व रामनिवास भंवरिया को विजयी घोषित किया गया। विजयी उम्मीदवारों में सुमित्रा आर्य लाडनूं की तरफ से उम्मीदवार थी, उन्हें कुल मतदान 217 में से सर्वाधिक 106 मत प्राप्त हुए। विजय की घोषणा के बाद नागौर में भाजपाईयों द्वारा उन्हें फूलमालाओं से लाद दिया गया तथा खुली गाडिय़ों में शहर केे मुख्य मार्गों से विजय जुलुस निकाला गया। जिला परिषद से शुरू होकर शहर के विभिन्न रास्तों से गुजरते हुए गांधी चौक पहुंचकर भारी आतिशबाजी केे साथ जुलुस का समापन किया गया। ढोल-ताशों और नारेबाजी के बीच लोगों ने सभी स्थानों पर उनका स्वागत किया। उन्होंने नागौर के प्रसिद्घ बंशीवाला मंदिर में दर्शनकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
पहले भी बनाया जीत का रिकॉर्ड
 श्रीमती आर्य ने गत दिनों संपन्न नगरपालिका चुनावों में अपने वार्ड से सर्वाधिक 715 मतों से विजयी रहकर एक रिकॉर्ड बनाया था। जहां तक जानकारी है, नगर निगमों व नगर परिषदों को छोड़ दें तो उन्हानें समूचे राजस्थान की नगर पालिकाओं में सर्वाधिक मतों के अन्तर से जीत हासिल करने का रिकार्ड कायम किया है। लाडनूं नगर पालिका से वे दूसरी बार पार्षद के रूप में विजयी हुई है। पहले वे सन 2000 से 2005 तक बिना किसी आरक्षण के विजयी होकर पालिका में पहुंची थी।
 उनका राजनैतिक जीवन
वे भाजपा महिला मोर्चा की लम्बे समय तक जिलाध्यक्ष रह चुकी। इस पद पर रहकर उन्होंने पार्टी हित में कई कदम उठाए।  वे भाजपा खेलकूद प्रकोष्ठ की प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य, महिला मोर्चा की प्रदेश सदस्य, भाजपा की जिला सदस्य आदि पर रहने के अलावा राजस्थान राज्य समाज कल्याण बोर्ड , जयपुर में राज्य बोर्ड की सदस्य, जिला सतर्कता समिति नागौर की सदस्य, जिला स्तरीय बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति की सदस्य, जिला स्तरीय पुलिस समुदाय समन्वय समिति की सदस्य आदि  के रूप में अनेक जिला व उपखण्ड स्तरीय राजकीय समितियों में रहकर अपनी सेवाएं दे चुकी।
सामाजिक जीवन

वे सैनी समाज के क्रियाकलापों में भी लगातार सक्रिय रही हैं। सैनी महिला मण्डल की संयोजक रहने के अलावा उन्होंने अखिल भारतीय सैनी सेवा समाज की राजस्थान प्रदेश महिला इकाई का प्रदेश उपाध्यक्ष पद भी संभाला। सैनी समाज के पुष्कर अधिवेशन में उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका। सैनी समाज लाडनूं व अन्य संस्थाओं में भी वे सम्मानित हो चुकी। वे अनेक एन.जी.ओ. में रहकर  तथा विभिन्न अन्य सामाजिक संस्थाओं में रहकर समाज सेवा के विभिन्न आयामों में कार्य कर चुकी। सैनी घोष मासिक, वेद भास्कर पाक्षिक व कलम कला पाक्षिक में वे बतौर पत्रकार भी प्रतिस्थापित हैं। वे अनेक पत्रकार संगठनों में जिला स्तरीय पदों को भी संभाल रही हैं।

                                                                                

माता-पिता के लिये राज्यकर्मियों के वेतन से 10 प्रतिशत कटौती की मांग
  लाडनूं।भारतीय जनता पार्टी की जिला मंत्री श्रीमती सुमित्रा आर्य ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर मांग की है कि राज्य के समस्त कर्मचारियों के लिये यह व्यवस्था लागू की जावे कि उनके वेतन का 10 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से कटौती किया जाकर शेष का भुगतान उन्हें वेतन के रूप में किया जावे। जो 10 प्रतिशत कटौती की जावे, उसे उनके माता-पिता के खाते में सीधे जमा करवाया जावे, ताकि उनके भरण-पोषण की व्यवस्था संभव हो सके। पत्र में आर्य ने लिखा है कि सरकार द्वारा राज्य कर्मचारियों के वृद्ध माता-पिता को वृद्धावस्था पेंशन योजना से दूर रखा गया है। ऐसी स्थिति में उनका भरण-पोषण हो पा रहा है या वे उपेक्षित हैं, इसका सही आकलन संभव नहीं है। अगर वेतन कटौती याजना शुरू कर दी जाती है तो प्रदेश के अधिकांश कर्मचारियों के माता-पिता की देखरेख राज्य सरकार में निहित हो जायेगी और इससे कर्मचारी भी चिंतामुक्त बन सकेंगे। श्रीमती आर्य ने लिखा है कि हाल ही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में वसंतराव चौगुले को-आपरेटिव सोसायटी ने इस सम्बंध में पहल की है और अपने 150 कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत की कटौती करके उसे उनके माता-पिता के जोइंट एकाउंट में डालना शुरू कर दिया है। इस तरह माता-पिता वृद्ध होकर भी अपनी जरूरतों को पूरी करने के लिये पैसे के लिये किसी के मोहताज नहीं रहते।