माता-पिता के लिये राज्यकर्मियों के वेतन से 10 प्रतिशत कटौती की मांग
लाडनूं।भारतीय जनता पार्टी की जिला मंत्री श्रीमती सुमित्रा आर्य ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर मांग की है कि राज्य के समस्त कर्मचारियों के लिये यह व्यवस्था लागू की जावे कि उनके वेतन का 10 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से कटौती किया जाकर शेष का भुगतान उन्हें वेतन के रूप में किया जावे। जो 10 प्रतिशत कटौती की जावे, उसे उनके माता-पिता के खाते में सीधे जमा करवाया जावे, ताकि उनके भरण-पोषण की व्यवस्था संभव हो सके। पत्र में आर्य ने लिखा है कि सरकार द्वारा राज्य कर्मचारियों के वृद्ध माता-पिता को वृद्धावस्था पेंशन योजना से दूर रखा गया है। ऐसी स्थिति में उनका भरण-पोषण हो पा रहा है या वे उपेक्षित हैं, इसका सही आकलन संभव नहीं है। अगर वेतन कटौती याजना शुरू कर दी जाती है तो प्रदेश के अधिकांश कर्मचारियों के माता-पिता की देखरेख राज्य सरकार में निहित हो जायेगी और इससे कर्मचारी भी चिंतामुक्त बन सकेंगे। श्रीमती आर्य ने लिखा है कि हाल ही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में वसंतराव चौगुले को-आपरेटिव सोसायटी ने इस सम्बंध में पहल की है और अपने 150 कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत की कटौती करके उसे उनके माता-पिता के जोइंट एकाउंट में डालना शुरू कर दिया है। इस तरह माता-पिता वृद्ध होकर भी अपनी जरूरतों को पूरी करने के लिये पैसे के लिये किसी के मोहताज नहीं रहते।
लाडनूं।भारतीय जनता पार्टी की जिला मंत्री श्रीमती सुमित्रा आर्य ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर मांग की है कि राज्य के समस्त कर्मचारियों के लिये यह व्यवस्था लागू की जावे कि उनके वेतन का 10 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से कटौती किया जाकर शेष का भुगतान उन्हें वेतन के रूप में किया जावे। जो 10 प्रतिशत कटौती की जावे, उसे उनके माता-पिता के खाते में सीधे जमा करवाया जावे, ताकि उनके भरण-पोषण की व्यवस्था संभव हो सके। पत्र में आर्य ने लिखा है कि सरकार द्वारा राज्य कर्मचारियों के वृद्ध माता-पिता को वृद्धावस्था पेंशन योजना से दूर रखा गया है। ऐसी स्थिति में उनका भरण-पोषण हो पा रहा है या वे उपेक्षित हैं, इसका सही आकलन संभव नहीं है। अगर वेतन कटौती याजना शुरू कर दी जाती है तो प्रदेश के अधिकांश कर्मचारियों के माता-पिता की देखरेख राज्य सरकार में निहित हो जायेगी और इससे कर्मचारी भी चिंतामुक्त बन सकेंगे। श्रीमती आर्य ने लिखा है कि हाल ही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में वसंतराव चौगुले को-आपरेटिव सोसायटी ने इस सम्बंध में पहल की है और अपने 150 कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत की कटौती करके उसे उनके माता-पिता के जोइंट एकाउंट में डालना शुरू कर दिया है। इस तरह माता-पिता वृद्ध होकर भी अपनी जरूरतों को पूरी करने के लिये पैसे के लिये किसी के मोहताज नहीं रहते।
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